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प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटीज़ (Problem Solving Abilities)

प्रॉब्लम सॉल्व करना अपने आप में एक टेढ़ी खीर है !

रिसर्च के दौरान पता चला है की, फार्च्यून ५०० कंपनियों में सबसे ज्यादा इसी कौशल को
अहमियत दी जाती है !

"प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटीज़" (problem solving abilities) अपने आप में एक मुक्कम्मल कौशल नहीं है !

इसको हमेशा "लॉजिकल कॉन्कलूजन" (logical conclusion)की जरुरत पड़ती है !

और अव्वल दर्जे के "लॉजिकल कॉन्कलूजन" के लिए "डिसिजन मेकिंग" (decision making) की जरुरत पड़ती है !

और इन तीनो को को कार्यविधि में लाने के लिए , "क्रिटिकल थिन्किंग" (critical thinking) की आवश्यकता पड़ती है !

पहली बार कार का इस्तेमाल 1768 में हुआ था, तब ये स्टीम से चलती थी !
तब से ले कर आज तक कार में  बहुत सारे तकनिकी बदलाव हुए हैं !
अब ये लगभग 200 km तक जा सकती है !

ऊपर दिए गए स्किल्स (skills) कार के ४ पहियों की तरह हैं !


इन चारों स्किल्स (skills) को एक ड्राइवर ही ऑप्टिमाइज़ (optimize) कर सकता है !

लेकिन इसके लिए जरुरी है की वो पहले इन चार स्किल्स पर महारथ हाशिल करे !

एक लैपटॉप (laptop) के विंडोज (windows) को चलाने के लिए हार्डवेयर (hardware) , 

सॉफ्टवेर (software) , ड्राइवर्स (drivers), एंटी वायरस (antivirus) और बिजली (electricity) की जरुरत पड़ती है !

ठीक उसी प्रकार इंसान के विंडोज (windows) को चलाने के लिए 18 स्किल्स (skills) की जरुरत पड़ती है !

इन 18 स्किल्स पे, मैं अपने आने वाले ब्लॉग पर चर्चा करूँगा ! धैर्य से पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद !

कृपया जुड़े रहें , आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है !
प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटीज़ (Problem Solving Abilities) प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटीज़ (Problem Solving Abilities) Reviewed by Yogesh on Saturday, August 20, 2016 Rating: 5

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