हिंदी
लिखना, मेरे लिए कभी आसान नहीं रहा, लेकिन नई पीढ़ी के लिए ये संभव करना मेरी लेखनी
का एक अहम उद्देश्य है ! जरा गौर फरमाइए, समाचार, कमेंट्री, गाने, संवाद, अखबार,
व्हाट्सप्प, फेसबुक, एस एम एस , इत्यादि सभी कुछ हमारे अंदर परिवर्तन
ला रहे हैं और हम अंग्रेजी से अभ्यस्त होते जा रहे हैं !
इसे कहते
हैं परिवर्तन की प्रक्रिया - बहुत धीरे ही सही, हिंदी बोलने वाले, हिंदी सुनने
वाले, हिंदी साहित्य, हिंदी सोंच का धीरे धीरे दर्दनाक अंत हो रहा है !
आइये
दूसरे पहलु को भी समझने की कोशिश करतें हैं !
भारत में
शादी का माहौल और आमंत्रण ! यह सोंच ही आनंद की अनुभूति देता है ! मंत्र मुग्ध कर
देने वाले संगीत, बरातियों का स्वागत, ढोल नगाड़े, बैंड बजा, मेंहदी, हल्दी की
रस्मे, दूल्हे का घोड़ी चढ़ना इत्यादि हमारे सोंच और जहन का अंतरंग हिस्सा है
! संगीत का मजमून नव दम्पति के शादी के मूड को दर्शाता है ! कोई वक्ता इन
कार्यकलापों का मधुर वर्णन करता रहता है !
शादी के
उपलक्ष्य में एक वक्ता नए रिश्तों की शुरुआत और नई संभावनाओं पर चर्चा करता
हैं ! वक्ता हंसाते हुए जिंदगी के उन पहलुओं पे प्रकाश डालता है जैसे पहली
नज़र का मिलना और पहली मुलाकात, पहला आलिंगन, शादिओं के बहुत सारे प्रसंगों का
आयोजन, बहुत सारी खरीदारी इत्यादि !
अलग अलग
समुदायों में, बहुत सारे तरीके अपनाये जाते हैं, कई बार तो महीना भी लग जाता है,
शादी से पहले और कुछ रीतियाँ तो शादी के बाद तक चलती रहती हैं !
सूत्रधार
ने बहुत ही उमदा तरीके से नवदम्पति को मानसिक रूप से तैयार किया !
जैसे जैसे शाम आगे बढ़ती है , श्रोतागण अपने दोस्तों को बधाइयाँ, आलिंगन देते
हैं ! लोग मस्ती में शराबोर होते हैं ! चूँकि मेरे जान पहचान के
ज्यादा लोग नहीं थे, इसलिए मैं गाने और कमेंट्री का आनंद ले रहा था !
अचानक
मुझे ये अहसास हुआ की यह कितना सुन्दर और जरुरी परिवर्तनकाल है , जहाँ नव दम्पति
को साइकोलॉजिकली , इमोश्नली , इस्पिरिचुअल्ली, लॉजिकली, प्रैक्टिकली
शादी के पवित्र बंधन के लिए तैयार किया जा रहा है ! इसे कहते हैं परिवर्तन ! नव
दम्पति के परिवार और दोस्त मिलकर इसे आयोजित करते हैं और नव दम्पति शादी के महान
समारोह को जिंदगी भर निभाने के लिए मानसिक रूप से रज़ामंद करते हैं !
इस
संस्कण से पहले मैंने हमेशा अपनी दृष्टिकोण को सही और अच्छा माना है !
जैसे की साधारण शादी (अदालत में) और उसके बाद स्वागत समारोह, ताकि शादी के रीति
रिवाज़ों से बचा जा सके ! और मैंने अपनी सोंच को हमेशा आधुनिक और प्रगतिशील समझा है
!
लेकिन उस
शाम, मैंने अहसास किया की मैंने क्या खोया और क्या पाया है - परिवर्तन का अहसास और
मौका - जो की एक निहायिति जरुरी प्रक्रिया है ! आपने तितली और कैटरपिलर वाली कहानी
तो सुनी ही होगी !
जिंदगी
के हर एक पड़ाव पर, आप पाएंगे 'परिवर्तन' ! शैशव अवस्था से बाल्य अवस्था, बाल्य से
वयस्क, वयस्क से दांपत्य, दांपत्य से पैतृक, पैतृक से फिर आगे...... ! अगर किसी भी
कारण से हम इस परिवर्तन की प्रक्रिया से मरहूम रह गए तो हम जिंदगी के
अगले पड़ाव से न तो संबंध जोड़ पाएंगे और न ही उसका आनंद ले पाएंगे !
जैसे पेड़
से अगर कच्चा फल तोड़ लें तो सफेद रंग का द्रव बहार आता है ! ये संकेत हैं की उसका
पोषण जारी था ! यानी की कच्चेपन से पक्केपन की अवधी अभी बांकी थी ! और कच्चा
फल कभी भी वो स्वाद नहीं दे सकता, जो स्वाद वह परिवर्तन की प्रक्रिया के बाद देता
!
छुट्टीओं
पे जाना है, परिवार को परिवर्तन / तैयारी का मौका दें !
रात की
नींद अच्छी हो यह परिवर्तन है दूसरे दिन की तैयारी की !
बच्चे का
स्कूल जाना परिवर्तन है, अगले क्लास में जाने की !
छुट्टियां
परिवर्तन है बच्चे की जिंदगी के लिए !
आपकी
ट्रेनिंग परिवर्तन है आपकी नयी नौकरी के लिए !
अव्वल
दर्जे के लोग कर्म सम्बन्धी अनुष्ठानो का पालन करते हैं - कभी सोचा है क्यों -
क्यूंकि यह भी एक परिवर्तन है !
जरा
सोचिये माँ पिता छोटे बच्चे के प्रति कितने व्याकुल होते हैं - दूसरे बच्चों के
मुकाबले जल्दी बोले, खड़ा हो सके, चल सके ! दूसरों की तुलना में पीछे न रह जाये !
बहुत सारे माता पिता अंपने बच्चों को समय से पहले स्कूल भेजने की कोशिश करते हैं !
अपनी जिंदगी के तत्त्वज्ञान, उनका शौक़ क्या हो, पेशा अथवा जीवन-यात्रा कैसी हो,
वो भी खुद ही तय करना चाहते हैं !
हम
उन्हें जिंदगी की एक अवस्था से दूसरे में धक्का दे देते हैं बिना परिवर्तन
का मौका दिए हुए !
हम
उन्हें वयस्क बना देते हैं बाल्य अवस्था का अनुभव किये बगैर ! हम उन्हें व्यव्शाय
दिशानिर्देश पे चलने पर मजबूर करते हैं और जिंदगी के दिशानिर्देश में वो अशफल हो
जाते हैं ! इसीलिए जिंदगी के एक दो पहलुओं में तो, वो सफल हो जाते हैं लेकिन बहुत
सारे पहलुओं पर असफल और डाँवाडोल हो जाते हैं !
नतीजा
वो, या तो दुखद रूप से सफल व्यक्ति या सफल रूप से दुखी व्यक्ति बन जाता है !
प्रकृति
हमें शानदार ढंग से परिवर्तन सीखा देती है ! इसीलिए स्वस्थ बच्चे के जनम में ९
महीने लगते हैं ! ऐसा कभी नहीं होता आज गर्भ धारण किया और कल पैदा कर दिया ,
क्या यह संभव है ? प्रकृति को मालूम है स्त्री कभी भी माँ का फ़र्ज़ नहीं निभा
पायेगी, बिना इस परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजरे !
यह
परिवर्तन कितना महत्वपूर्ण अंग है हमारे जीवन का, जरा सोंचिये !
आप वाहन
शुरू करते वक्त कभी भी चौथे गियर में नहीं डालते ! न्यूट्रल गियर पे डाल के आप
परिवर्तन का अहसास करते हो ! कई लोगों को चौथे गियर में डालने की इतनी जल्दी
होती है , फिर भी वो मंजिल पे नहीं पंहुच पाते !
परीक्षा
से पहले का काम , महत्वपूर्ण बैठक पे १० मिनट जल्दी पंहुचना, आपको मानसिक रूप से
तैयार कर देता है ! बैठक के दौरान नए कार्य के लिए भी जरुरी है परिवर्तन !
मैंने तो
परिवर्तनकाल को एक बहुत ही अग्रिम और महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया है ! जिंदगी के
हर एक दौर को उत्सव में बदल लिया है ! मैंने इस सीख और उपलब्धि को अपनी
जिंदगी का स्थायी और खुसनुमा हिस्सा बना लिया है ! खुस हो कर
परिवर्तन की प्रक्रिया का आनंद उठाइये !
भोजन से
लेकर पाचन और उसके बाद की प्रक्रिया, एक स्वस्थ शरीर और परिवर्तन की निसानी है !
अगर ये शुचारु रूप से परिवर्तन की प्रक्रिया से नहीं गुजर रहा, तो निश्चित तौर पर
आप अस्वस्थ हैं ! मस्त मलंग रहने के लिए परिवर्तन के प्रक्रिया को उचित समय दें !
अब आप तो
समझ गए होंगे की, यह आलेख पढ़ने के बाद, आप अपने आप को परिवर्तन के अहसास का अनुभव
कराएं ! लेखनी में त्रुटियाँ जरूर होंगी, कृपया छमा करें ! जाइए खुशियां
मनाइये और इस प्रसनत्ता को शेयर कीजिये !
लेखक
: हैरी ( योगेश )
परिवर्तन की प्रक्रिया !
Reviewed by Yogesh
on
Friday, August 12, 2016
Rating:

No comments: