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ये सच या वो सच

राजन बिना पानी और खाने के दिन रात चलते रहे ! उन्होंने सारी आशाएं छोड़ दी और अपने राज्य से बहार निकल गए ! पडोसी राज्य के द्वार पे गरीबों को खाना बट रहा था, वो भी उस लाइन में शामिल हो गए ! लेकिन जब तक वो काउंटर पर पहुंचते, खाना खत्म हो गया था !
माफ़ करना, हे मनुष्य, मैं तुम्हे माढ़ दे सकता हूँ , मेरे पास सिर्फ माढ़ ही बचा है ! राजन उस दानवीर की असमर्थता  पर रोये और कहा, ठीक है दे दो !  राजन को एक कटोरा माढ़ देने के बाद काउंटर बंद हो गया ! जैसे ही राजन ने माढ़ पीने के लिए कटोरे को मुंह से लगाया, एक उक़ाब ने उस कटोरे पर झप्पट्टा मार  दिया और वो माढ़ मिटटी में मिल गया ! राजा जनक ने वो आखिरी आशा छोड़ कर जमीं पर गिर पड़े ! वो बहुत दर्द महसूस कर रहे थे और घाव से खून भी रिश रहा था ! काफी दिनों से भोजन के आभाव में  शक्तिहीन  हो गए थे, इसलिए रोना भी मुमकिन नहीं हो पा रहा  था !
राजन आखरी बार सारी  शक्ति बटोर के चिल्लाये - हे भगवन !
ठीक उसी समय उनका सेवक शयन  कक्ष में आया और राजन को पलंग पर बैठे देखा ! राजन को बहुत पसीना आ रहा था  और वो आश्चर्य और दर्द से परेशान थे ! वह  एक स्वप्न था ! 
सेवक से पूछा, "राजन आप ठीक तो हैं ?" 
राजन ने अपने सेवक की ओऱ देखा और गहरी सांस लेकर बोले , " ये सच या वो सच "
सेवक ने रानी और दरबारिओं को बुलाया ! सभी लोग राजन की स्वास्थ्य की चिंता कर रहे थे ! लेकिन राजा जनक एक ही बात दोहरा रहे थे,  " ये सच या वो सच "  
दिन गुजरते गए, बहुत सारे डॉक्टर , साधु  और गुरु राजन को मिले और उनसे बात करने की चेष्टा  की ! लेकिन राजन इन शब्दों  के आलावा और कुछ बोलते ही नहीं थे !
बहुत सारी अफवाएं थी की राजा जनक ने अपनी बुद्धि पर नियंत्रण खो दिया है ! जबकि राजा जनक अपने समय के सबसे महान व्यक्ति थे !
ये स्तिथि काफी दिन तक चल गयी, दरबार में कोई भी काम आगे नहीं बढ़ रहा था ! राजन सिर्फ दरबारिओं को देखते रहते और बोलते रहते,  " ये सच या वो सच "   
एक दिन, ऋषि अस्टावक्र मुनि राजा जनक की राजधानी से गुजर रहे थे और राजन के रहस्यमय व्यव्हार के बारे में सुना ! मुनि राज दरबार में पहुंचे ! राजा जनक को शून्य अभिव्यक्ति में देखा ! ऋषि ने पूछा महाराज जनक, क्या समस्या है ?
राजा जनक ने उनको देखा ! अमूमन वो ऋषि के पैर छूते थे लेकिन आज, वो भुनभुनाये, " ये सच या वो सच "  
इतना सुनते ही ऋषि ने आँखें मूंदी और समस्या समझ गए !
कहा राजन आप अभी दरबार में हैं, क्या आप सपने में जो दर्द, भूख,अपनों का विमुख होना, तड़पना महसूस किया था, अभी महसूस कर रहे हैं ? राजन ने कहा नहीं !
जब आप सपने में परेशानियों और कमजोरीपन महसूस कर रहे थे तो आपके के दरबार के बाहुबलियों और राज्य की ताक़त महसूस कर रहे थे ? राजन ने कहा नहीं !
ऋषि ने कहा - न ये सच और न वो सच ! तू ही सच !
तू है तुरिय (विटनेस).......
माण्डूक्य  उपनिषद्  में इसका वर्णन किया गया है ! ऐसे ही और भी लेखनी मैं आपके सामने लाता रहूँगा !


ये सच या वो सच ये सच या वो सच Reviewed by Yogesh on Friday, August 12, 2016 Rating: 5

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