शब्दों में दुनिया है , और दुनिया में शब्द हैं ,
इन्ही शब्दों से आप किसी को रुला सकते हैं , हँसा सकते हैं, तड़पा सकते हैं और धोका दे सकते हैं,
इन्ही शब्दों से मुग़ल साम्राज्य का पतन हो गया,
इन्ही शब्दों से मोदी जी प्रधान मंत्री हो गए,
ओबामा राष्ट्रपति और केजरीवाल जी मुख्यमंत्री हो गए,
शब्दों की महिमा को समझिये
यही शब्द छन में अस्त्र, और छन में शस्त्र बन जाते हैं,
और अश्त्र और शस्त्र तो कोई योद्धा ही चला सकता है,
शब्द कब अश्त्र और कब शस्त्र बनेंगे , इसके लिए छोटे छोटे अलंकार बनाये गए हैं,
जैसे कॉमा (,), फुल स्टॉप (.), इनवर्टेड कमास (" "), स्लैश (/), सेमि कॉलम (;), डबल डॉट (:), डैश (-), क्वेश्चन मार्क (?), एक्सक्लेमेशन (!) सिंगल कोटे (' ')
यही अलंकार हैं जो शब्दों के आगे या पीछे लग जाएँ तो,
अर्थ का अनर्थ कर देते हैं और अनर्थ को अर्थ का रूप दे देते हैं,
इनसे प्रेम करें, भावनात्मक तौर पे जुड़ें और अभ्यास करें , यकीं मानिये, ये दुनिया बदलने की छमता रखते हैं!
देश की आज़ादी में हिंदी साहित्य का योगदान प्रसंसनीय है!
कुछ लोगों को मेरी श्रद्धांजलि, भारतेंदु हरिश्चन्द्र , देवकी नंदन खत्री, मुंशी प्रेमचंद , मैथिलि शरण गुप्त, बाबु गुलाब राय , जयशंकर प्रसाद , शहजानंद सरस्वती , राहुल सांकृत्यायन , गुरु भक्त सिंह 'भक्त' , सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' , यशपाल , जैनेन्द्र कुमार , हज़ारी प्रसाद द्विवेदी , महादेवी वर्मा , रामधारीसिंह दिनकर , राम रतन भटनागर , फणीश्वरनाथ रेनू , राम चंद्र झा , हरिशंकर परसाई , नरेश मेहता , भूपेन्द्रनाथ कौशिक 'फ़िक्र' , मेहरुन्निशा परवेज़ , दरचावणा , मोहन राणा , पैग़ाम अफक्वि , हृषिकेश सुलभ , शैलेन्द्र चौहान , सूर्यकुमार पांडेय , विभूति नारायण राय , नरेंद्र कोहली , बद्री नारायण सिन्हा , धर्मवीर भारती , विवेक राय , राजकमल चौधरी , रघुवीर सहाय , निर्मल वर्मा !
बौद्धिक विकास के लिए आप व्हाट्सएप्प द्वारा भी संपर्क कर सकते हैं !
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यही शब्द छन में अस्त्र, और छन में शस्त्र बन जाते हैं,
और अश्त्र और शस्त्र तो कोई योद्धा ही चला सकता है,
शब्द कब अश्त्र और कब शस्त्र बनेंगे , इसके लिए छोटे छोटे अलंकार बनाये गए हैं,
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यही अलंकार हैं जो शब्दों के आगे या पीछे लग जाएँ तो,
अर्थ का अनर्थ कर देते हैं और अनर्थ को अर्थ का रूप दे देते हैं,
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शब्दों की महिमा
Reviewed by Yogesh
on
Monday, August 15, 2016
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