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केंद्रबिंदु अथवा FOCUS

चाहना और करना  दो भिन्न बातें हैं !  हमारे अंतरमन  में बहोत सी बातें चल रही होती हैं लेकिन पनपती वही हैं , जिनको हम हवा देते हैं ! ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे मन में प्राथमिकता के आधार पर सूचि तैयार हो जाती है ! और हम हरेक काम को "उच्च मूल्य" या  "कम मूल्य" के आधार पर आंकते हैं ! आइए  समझने  की कोशिश करते हैं क्यों हम चूक जाते हैं !  

उत्तर  है - केंद्रबिंदु अथवा FOCUS !

चलिए एक प्रयोग करते हैं ! एक आतशी शीशा (Magnifying glass) और अख़बार लेते हैं ! सूर्य की तेज रौशनी उस आतशी शीशे के माध्यम से अख़बार के पुलिंदे पर डालते हैं ! इस  प्रयोग से हम सूर्य के किरणों के तेज़ को कई गुना बढ़ा कर अख़बार जलाने की कोशिश करते हैं  !
लेकिन अख़बार जल नहीं  रहा , ऐसा क्यों ? क्योंकि शीशा स्थिर नहीं  है ! 
जैसे ही हम शीशे को स्थिर करते हैं, शीशा किरणों को  केंद्रित कर के  सूर्य की ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देता है और लपटें उठने लगती हैं ! 
ठीक उसी प्रकार हमारे सोचने की शक्ति भी काम करती है ! आप भी अपने विचारों को ignite कर सकते हैं ! 

केंद्र बिंदु अथवा focus का क्या मतलब है ?
आपका टैलेंट , ऊर्जा , दीवानगी, शरीर का हरेक अंग , एक एक पल , सब एक ही कार्य में इतने लीन हो जाने चाहिए कि बांकी सब चीज़ें छोटी देखने लगें !
      ब्रह्माण्ड में ऐसा ही कुछ होता है, जिस चीज़ पर  हम नज़र डालते है, वो आश्चर्यजनक रूप से बड़ी होने लगती है ! ठीक उसी प्रकार हमें अपने लक्ष्य पर केंद्रित होना पड़ेगा !
निचे दिए गए टेबल के आधार पे, आप अपना कार्य मुक़र्रर कर सकते हैं !
 क्या चाहिए 
प्राथमिक सूचि बनाएं 
 कब तक 
साल में 
महीने में 
 क्या करना पड़ेगा 
 कितनी बार 
इस टेबल की एक कॉपी आप अपनी जेब में रखेंगे 

मोबाइल पर  रिमाइंडर्स अथवा अलार्म्स डाल  सकते हैं 
कंप्यूटर स्क्रीन, डायरी , बैंड्स, पोस्टर्स , सब  कॉन्शियस माइंड , नोटिस बोर्ड , whatsApp DP , chat status सभी जगह पर आप अपनी चाहत छाप दीजिये और उसके पीछे पड़ जाइए !

कुछ दिनों के बाद आप अपने आप को मंज़िल  के करीब पाएंगे !
आपका कार्य मंगलमय हो !
केंद्रबिंदु अथवा FOCUS केंद्रबिंदु अथवा FOCUS Reviewed by Yogesh on Tuesday, August 16, 2016 Rating: 5

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