रग्घू के चाचा एक निहायती अमीर व्यवसायी थे ! अपने चाचा को देख देख कर वह बड़ाहुआ था ! रग्घू काफी जिज्ञाषु किस्म का लड़का था ! वो अक्सर चाचा के इर्दगिर्द ही रहता और बारीकी से उनके कार्यकलापों को सीखने की कोशिश करता !
एक दिन उसके चाचा ने निर्णय किया की , वह अपनी सारी संपत्ति दान में दे देंगे !
रग्घू को जब इस बात का पता चला तो वो, चाचा से पूछने चला गया ! रग्घू ने पूछा चाचा ऐसा क्यों ?
चाचा ने जवाब दिया, "आज से अमीरी छोड़ दी मैंने"
!
चाचा से ऐसी बात सुन कर, राम ने कहा, मैंने भी छोड़ दी !
चाचा ने कहा की, मेरे पास तो बेसुमार धन सम्पदा थी, जो मैंने छोड़ दी,
पर तेरे पास क्या था जो तूने छोड़ दिया !
रग्घू ने मुस्कुरा कर कहा, आज से "गरीबी छोड़ दी मैंने"
इस कहानी से क्या सीख मिलती है !
आपके पास बहुत सी चीज़ें हैं "पाने" और "छोड़ने" के लिए !
इसे किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है......
एक सूचि तैयार करें "क्या छोड़ना है" और "क्या पाना है " सभी घरवालों को प्रेरित करें सूचि बनाने की !
बार बार इनमे लिखी हुए बातों की चर्चा करें, आप देंखेंगे की नियमित तौर पर पालन करने से निश्चित बदलाव होगा !
करत करत अभ्यास के जङमति होत सुजान, रसरी आवत जात, सिल पर करत निशान।
मतलब, बार बार रस्सी को पत्थर पर घिसने से निशान पड़ जाता है, इसी तरह निरंतर अभ्यास से मूर्ख व्यक्ति भी बुद्धिमान बन सकता है।
गरीबी छोड़ दी मैंने
Reviewed by Yogesh
on
Wednesday, August 24, 2016
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But how come raghu became ram yogeshji... subodh
ReplyDeleteHey that was a point. Earlier I had written RAM as character.Thanks.
DeleteNice blog
ReplyDeleteDear Rajeshji. Thanks. Kindly share with yur near n dear ones.Stay tuned for more.....
ReplyDeleteDear Rajeshji. Thanks. Kindly share with yur near n dear ones.Stay tuned for more.....
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