चलिए विवेचन करते हैं !
मानने और जानने में क्या फर्क है ?
हमारा हाथ आग में जल जायेगा, ऐसा आप मानते हैं या जानते हैं ?
कई लोग इसका उत्तर कुछ ऐसे देते हैं - मानता भी हूँ और जानता भी हूँ !
ऐसा हो नहीं सकता - या तो आप मानते हैं या फिर जानते हैं !
मानते हैं तो जानने की जरुरत है और जानते हैं तो मानना बेमानी है !
भगवान में आप मानते हैं या जानते हैं ?
अगर आप कहते हैं की मैं जनता हूँ, तो मैं कहूंगा- मुझे मिलवाओ, कहाँ
रहता है, कैसा दीखता है !
अगर नहीं मिलवाते हैं तो इसका मतलब है आप मानते हैं !
मनुष्य पूरी जिंदगी, मानने और जानने के बीच ही सफर करता रहता है
!
लेकिन ऐसा पाया गया है, जो दिवा स्वप्न में होते हैं वो मानते हैं और जो
कर्म योगी होते हैं वो जानते हैं !
जितनी जल्दी आप मानने से जानने का सफर तय कर लें, आपके भविष्य के लिए
उतना ही बेहतर होगा !
मानने और जानने में क्या फर्क है ?
Reviewed by Yogesh
on
Monday, August 29, 2016
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