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विद्या

परदे में है चाहत , पूरा छुपता भी नहींसाफ़ दीखता भी नहीं,
या तो परदा हटा लेया फिर चेहरा ही दिखा दे,

चाहते दीदार करा देवरना चाहत को ही मिटा दे,
मिट के हम कण कण में बिखर जायेंगे,

इस समस्त संसार को तेरा दीवाना बना जायेंगे,
दीवानगी तो बहुत देखि होगी तूने,
तेरी महफ़िल में दीवानों का कारवां लगा जायेंगे,
हम गीली लकड़ी ही सहीपर ऐय 'विद्या',

लाखों के दिलों मेंतेरे लिए,  ज्ञानकी ज्योत जला जायेंगे !
विद्या विद्या Reviewed by Yogesh on Wednesday, September 07, 2016 Rating: 5

2 comments:

  1. please correct the spelling of mehmil in the last para..its mehphil i think....subodh

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