परदे में है चाहत , पूरा छुपता भी नहीं, साफ़ दीखता भी नहीं,
या तो परदा हटा ले, या फिर चेहरा ही दिखा दे,
चाहते दीदार करा दे, वरना चाहत को ही मिटा दे,
मिट के हम कण कण में बिखर जायेंगे,
इस समस्त संसार को तेरा दीवाना बना जायेंगे,
दीवानगी तो बहुत देखि होगी तूने,
तेरी महफ़िल में दीवानों का कारवां लगा जायेंगे,
हम गीली लकड़ी ही सही, पर ऐय 'विद्या',
लाखों के दिलों में, तेरे लिए, ज्ञानकी ज्योत जला जायेंगे !
या तो परदा हटा ले, या फिर चेहरा ही दिखा दे,
चाहते दीदार करा दे, वरना चाहत को ही मिटा दे,
मिट के हम कण कण में बिखर जायेंगे,
इस समस्त संसार को तेरा दीवाना बना जायेंगे,
दीवानगी तो बहुत देखि होगी तूने,
तेरी महफ़िल में दीवानों का कारवां लगा जायेंगे,
हम गीली लकड़ी ही सही, पर ऐय 'विद्या',
लाखों के दिलों में, तेरे लिए, ज्ञानकी ज्योत जला जायेंगे !
विद्या
Reviewed by Yogesh
on
Wednesday, September 07, 2016
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please correct the spelling of mehmil in the last para..its mehphil i think....subodh
ReplyDeletecorrected bro...thx a ton
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