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वक्त कम है

एक तो वक्त कम है, दूसरे जेब भी तंग है,
इंसानियत परेशां है, फिर भी दीखता दबंग है,

दीवाने मलंग है, सरकार अपंग है और  विरोधी तंग है,
फिर भी सबके बीच में ये कैसी सत्संग है,

अधिकतम जनता, सोयी हुई अंग है,
इसीलिए न्यूनत्तम लोग शाषण में रंगारंग है,

मोहे रंग दे, ऐसा सभी का ढंग है,
फिर भी दीखता, कटी पतंग है,

कविता पढ़नेवाला दंग है और कवी कि लेखनी में व्यंग है !
वक्त कम है वक्त कम है Reviewed by Yogesh on Wednesday, September 07, 2016 Rating: 5

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